दर्द बयां नहीं करता यू तो , मगर बेइंतहा रखता हूँ, किस्से बहुत है तेरे , मगर खामोश जुबां रखता हूँ

दर्द बयां नहीं करता यू तो , मगर बेइंतहा रखता हूँ
किस्से बहुत है तेरे , मगर खामोश जुबां रखता हूँ

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By | 2018-02-09T17:06:06+00:00 August 28th, 2017|Blog|0 Comments