दर्द बयां नहीं करता यू तो , मगर बेइंतहा रखता हूँ, किस्से बहुत है तेरे , मगर खामोश जुबां रखता हूँ
दर्द बयां नहीं करता यू तो , मगर बेइंतहा रखता हूँ किस्से बहुत है तेरे , मगर खामोश जुबां रखता हूँ
दर्द बयां नहीं करता यू तो , मगर बेइंतहा रखता हूँ किस्से बहुत है तेरे , मगर खामोश जुबां रखता हूँ
तेरे आईने को भी , तुझसे शिकायत होगी कुछ देखते हो कम, उसे भी मोहब्बत होगी.......
जिन्हे मोहब्बत थी , हमेशा मुन्तज़िर रहे वो ख्याल करते रहे , और तुम बेखबर रहे. ... मोहब्बत जिनसे थी, वो ही बेखबर निकले बाकी सारे ज़माने में, ये खबर…
पहना था बड़े शौक से , नया लिबास इस तरह कुछ रंग निकल गया , कुछ शौक- ऐ -मोहब्बत........ सीने में जलन इस कदर , और दिल में दर्द था…