क्या बात है शहर में , मयखाने बहुत है
शायद तेरे यहाँ , दीवाने बहुत हैं,
मैं भी एक मयखाने में , रहता हूँ आजकल
मेरे भी दर्द कुछ , पुराने बहुत हैं
कुछ दर्द बयां करता हूँ , गैरों मैं बैठकर
यु तो मेरे अपनों के , ठिकाने बहुत है
अब तुम क्यों सुनोगे , मेरी दास्तान
तभी तो शहर में , मयखाने बहुत है…………..
